साहित्य में महिला सशक्तिकरण: दशा और दिशा
Keywords:
महिला सशक्तिकरण, हिंदी साहित्य, नारी विमर्श, स्त्री चेतना, सामाजिक परिवर्तनAbstract
महिला सशक्तिकरण समकालीन समाज की एक केंद्रीय अवधारणा है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक स्तर पर समान अधिकार, अवसर और स्वतंत्रता प्रदान करना है। भारतीय संदर्भ में, यह अवधारणा विशेष महत्व रखती है क्योंकि यहाँ सदियों से पितृसत्तात्मक व्यवस्था ने महिलाओं की भूमिका को सीमित किया है। हिंदी साहित्य ने इस असमानता को उजागर करने, स्त्री की पीड़ा को स्वर देने तथा उसके सशक्त रूप को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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Copyright (c) 2018 International Journal of Open Publication and Exploration, ISSN: 3006-2853

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